शेडवेल बनाम शेडवेल

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Shedwell vs. Shedwell :

भूमिका – यह वाद प्रतिफल के सिद्धान्त से सम्बन्धित है ।

तथ्य तथा विवाद – इस वाद में वादी ने एक लड़की से विवाह करने का करार किया । प्रतिवादी (जो कि वादी का चाचा था) को जब यह पता चला तो उसने इस होने वाले विवाह के प्रतिफल में यह प्रतिज्ञा की कि वह वादी को 150 पौंड प्रतिवर्ष अपने जीवन-काल में तब तक देता रहेगा जब तक कि उसकी आय 600 गिनी (Guineas) नहीं हो जाती । अत: वादी ने उक्त लड़की (Ellen Nicholl) से विवाह कर लिया । वादी ने प्रस्तुत वाद प्रतिवादी के विरुद्ध उसके द्वारा की गई प्रतिज्ञा के अनुपालन कराने के लिए किया था । प्रतिवादी ने वाद का विरोध करते हुए कहा कि उसके द्वारा की गई प्रतिज्ञा का कोई प्रतिफल नहीं था, अत: इसका अनुपालन नहीं कराया जा सकता ।

निर्णय – न्यायालय ने निर्णय दिया कि उक्त प्रतिज्ञा के लिए यथेष्ट प्रतिफल था । अत: न्यायालय ने निर्णय वादी के पक्ष में दिया ।

प्रतिपादित नियम –  सामान्य नियम यह है कि यदि कोई पक्षकार किसी संविदा के अन्तर्गत कोई कार्य करने के लिए पहले से ही बाध्य है और उसी कार्य को करने के लिए वह कोई नई संविदा करता है तो इस नई संविदा को प्रतिफलविहीन माना जाता है । परन्तु यदि इस नई संविदा द्वारा वह कोई ऐसा कार्य करता है जिसको करने के लिए वह पहले से बाध्य नहीं था तो ऐसी संविदा को वैध माना जाता है । प्रस्तुत वाद में न्यायालय ने निर्णय दिया कि प्रतिवादी की प्रतिज्ञा प्रतिफलविहीन नहीं थी, क्योंकि विवाह का प्रमुख रूप से तो इनके पक्षकारों से ही सम्बन्ध होता है, परन्तु नजदीकी रिश्तेदारों के लिए भी यह एक हित का विषय हाता है । अत: यह कहा जा सकता है कि इससे उनको लाभ पहुँचता है । न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि वादी ने प्रतिवादी के कहने पर अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया । अत: वह इस वाद का अधिकारी है कि वह प्रतिवादी द्वारा किये गये वचन का अनुपालन करवा सके । मुख्य न्यायाधीश अर्ले (J. Erle) के शब्दों में –

“The marriage affects the parties there to, but in the second degree it may be an object of interest with a near relative, and in that sense a benefit to him, this benefit is also derived from the plaintiff at the uncle’s request if the promise of the annuity was intended as an inducement to marriage and the averment that the plaintiff relying on the promise, marriage is an agreement that the promise was an inducement to the marriage. This is a consideration averred in the declaration. and it appears to me to be expressed in the letter construed with the surrounding circumstances.”

निष्कर्ष – प्रतिवादी द्वारा की गई प्रतिज्ञा के लिए यथेष्ट प्रतिफल था; अत: वह अपनी प्रतिज्ञा का अनुपालन करने के लिए बाध्य था ।

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