गिरफ्तारी के नियम तथा गिरफ्तार व्यक्ति के कानूनी अधिकार

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गिरफ्तारी के नियम / Law on Arrest 
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत प्रत्येक भारतीय नागरिक दैहिक रूप से स्वतंत्र है तथा भारत में कहीं पर भी जहाँ कानून का अवरोध न हो आने या जाने के लिए स्वतंत्र है।
सर्वोच्च न्यायालय ने डी. के. बसु vs पश्चिम बंगाल राज्य तथा जोगिन्दर कुमार vs उत्तर प्रदेश राज्य के वाद में व्यक्ति की गिरफ्तारी के नियम व अधिकार के बारे में कई दिशा निर्देश दिये हैं जिन्हें अब दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 में संशोधन कर समाविष्ट कर लिया गया है।
CrPC की धारा 41 के अनुसार पुलिस किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है यदि वह भारत के किसी भी कानून का उल्लंघन कर चुका है या करने वाला है या करने की तैयारी कर रहा है लेकिन ऐसी गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस के लिए कुछ नियम है तथा गिरफ्तार व्यक्ति के कुछ अधिकार है जिसका पालन करना आवश्यक है ।

 

पुलिस अधिकारी द्वारा गिरफ्तारी के नियम

? प्रत्येक पुलिस अधिकारी किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय अपने नाम व पद का सही तथा स्पष्ट पहचान धारण करेगा।(CBI तथा RAW को छोड़कर)
? पुलिस अधिकारी यह निश्चित करेगा कि उक्त व्यक्ति जिसे वह गिरफ्तार कर रहा है वह कानून का उल्लंघन कर चुका है या करने वाला है या करने की तैयारी कर रहा है।
? अगर गिरफ्तारी अपराध घटित होने के बाद हो रही है तो पुलिस अधिकारी घटना का समन तैयार करेगा तभी उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकेगा।
CrPC कि धारा 41 (ख) के अनुसार पुलिस गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को कम से कम एक साक्षी द्वारा जो उसके परिवार का सदस्य है उससे अनुप्रमाणित करेगा।
CrPC कि धारा 41(ग) के अनुसार सरकार प्रत्येक जिलों में एक पुलिस नियंत्रण कक्ष स्थापित करेगी तथा नियंत्रण कक्ष के बाहर लगे नोटिस बोर्ड पर गिरफ्तार किये गए व्यक्ति के नाम, पते प्रदर्शित करेगी।

 

गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार

CrPC की धारा 41(घ) के अनुसार किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को अपने पसंद के अधिवक्ता से मिलने का अधिकार प्राप्त है।
? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22 (1) में भी गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी पसंद के विधि व्यवसायी से परामर्श करने का मौलिक अधिकार दिया गया है।
CrPC कि धारा 50 (1) के अनुसार किसी व्यक्ति को वारण्ट के बिना गिरफ्तार करने वाला पुलिस अधिकारी उस व्यक्ति को उस अपराध की, जिसके लिए वह गिरफ्तार किया गया है, ऐसी गिरफ्तारी के अन्य आधार तुरंत सूचित करेगा।
CrPC कि धारा 54 (क) के अनुसार गिरफ्तार होने के बाद गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान की जाएगी कि वह उक्त व्यक्ति सही गिरफ्तार किया गया है या नहीं।
CrPC कि धारा 55(क) के अनुसार अभियुक्त की रक्षा करने वाले व्यक्ति का यह कर्तव्य होगा कि वह अभियुक्त के स्वास्थ्य तथा सुरक्षा की देख-रेख करें।
CrPC कि धारा 56 के अनुसार पुलिस अधिकारी, गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तार करते के 24 घंटे में जमानत के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करेगा।
CrPC कि धारा 57 के अंतर्गत पुलिस अधिकारी गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तार करने के 24 घंटे में अनावश्यक यात्रा को छोड़कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगा।

 

महिलाओं की गिरफ्तारी के नियम व अधिकार

भारतीय संविधान व दण्ड प्रक्रिया संहिता के अनुसार किसी भी महिला को पुलिस द्वारा नोटिस या समन देकर पूछताछ के लिए थाने में नहीं बुलाया जा सकता है तथा विशेष परिस्थितियों में ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

CrPC की धारा 46(1) के अनुसार जब तक परिस्थितियाँ विपरीत नहीं हो किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। पहले मौखिक सूचना देनी होगी तथा समर्पण नहीं करने पर जबतक पुलिस अधिकारी महिला न हो तब तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
CrPC की धारा 46 (4) के अनुसार असाधारण परिस्थितियों के सिवाय, कोई महिला सूर्यास्त के पश्चात और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं की जाएगी।
CrPC की धारा 51 के अनुसार किसी स्त्री की शारीरिक परिक्षा केवल महिला चिकित्सा व्यवसायी या किसी महिला पुलिस द्वारा ही की जाएगी।
? गिरफ्तार के समय महिला को हथकड़ी नहीं लगाई जाएगी। हथकड़ी सिर्फ मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही लगाई जा सकती है।
? अपने वकील को बुलवा सकती है। यदि वकील रखने में असमर्थ है तो मुफ्त कानूनी सलाह की माँग कर सकती है।
? गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर महिला को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है।
? गिरफ्तारी के बाद महिला को महिलाओं के कमरे में ही रखा जाएगा।
CrPC की धारा 51 के अनुसार जब कभी किसी महिला को गिरफ्तार किया जाता है और उसे हवालात में बंद करने का मौका आता है तो उसकी तलाशी किसी महिला पुलिस द्वारा ही कराई जाएगी।
CrPC की धारा 53 (2) के अनुसार गिरफ्तार महिला की डाॅक्टरी जाँच केवल महिला डॉक्टर ही करेगी।

? CrPC की धारा 416 के अंतर्गत किसी गर्भवती महिला को मृत्युदंड से छूट दी गई है।

 

न्याय अधिकारी व जज की गिरफ्तारी के नियम व अधिकार

माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने न्यायिक अधिकारी की गिरफ्तारी के नियम व अधिकार के संबंध में कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं जो निम्न है-

  • यदि किसी न्यायिक अधिकारी या जज को किसी अपराध में गिरफ्तार किया जाना है तब उसे जिला जज या उच्च न्यायालय को सूचित करते हुए ही गिरफ्तार किया जाएगा
  • गिरफ्तार किये गए न्यायिक अधिकारी को पुलिस थाना नहीं ले जाया जायेगा जब तक कि संबंधित जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश इसके लिए आदेश न दे।
  • गिरफ्तार न्यायिक अधिकारी को उसके परिवार के सदस्यों, विधिक सलाहकारों और जिला एवं सत्र न्यायाधीश से संपर्क करने की तत्काल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
  • यदि तत्काल गिरफ्तार किया जाना आवश्यक हो तब गिरफ्तारी की सूचना संबंधित जिले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजी जाएगी।

 

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