निर्णय को परिभाषित करें। निर्णय एवं आदेश में क्या-क्या अन्तर है?

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निर्णय की परिभाषा (Definition of Judgement)

सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 2(9) में निर्णय को परिभाषित किया गया है। किसी डिक्री या आदेश के  न्यायाधीश द्वारा कथन निर्णय कहलाता है। निर्णय एक तरह से न्याय-निर्णयन होता है जो पक्षकारो के अधिकारों का अंतिम रूप से विनिश्चय करता है एवं उसमें कारणों का भी उल्लेख किया जाता है।

अश्वनी कुमार सिंह बनाम यू० पी० पब्लिक सर्विस कमीशन तथा अन्य, AIR 2003 SC के मामले में उच्चतम न्यायलय ने धारित किया की न्यायलय के किसी निर्णय को न्यायिक निर्णय के रूप में प्रस्तुत करते समय उसके द्वारा प्रयुक्त शब्द और पदों का निर्वचन किसी विधायन में प्रयुक्त शब्द और पदों की तरह नहीं किया जा सकता। न्यायिक निर्णय को लागु करते समय न्यायलय तथ्यों और परिस्थितियों की जाँच करते हुए उसे देखेगा की यह कैसे उक्त परिस्थितियों में लागु होता है?

निर्णय एवं आदेश में अन्तर (Difference between Judgement and Order)

आदेश किसी प्रस्तुत वाद के पर अथवा किसी पेटिशन या प्रार्थना पत्र से उद्भूत हो सकता है। आदेश द्वारा किसी अधिकारों का पूर्ण रूप से निर्धारण हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है। सभी आदेशों के विरुद्ध अपील नहीं होती है, सिर्फ अपीलीय आदेशों के विरुद्ध अपील होती है।

निर्णय, न्यायाधीश द्वारा दिया गया कथन है जो डिक्री या आदेश का आधार होता है। निर्णय, डिक्री या आदेश के पारित करने की पूर्व स्थिति होती है। निर्णय के बाद ही आदेश या डिक्री होती है।

निर्णय एवं आदेश में निम्न्लिखित अन्तर है-

  1. परीभाषा सम्बन्धी अन्तर – निर्णय न्यायाधीश के अंतिम निर्णय है जिसके द्वारा एक मुकदमा समाप्त कर दिया जाता है, जबकि आदेश किसी मामले को समाप्त नहीं करता।
  2. विषय-वस्तु सम्बन्धी अन्तर – एक निर्णय की स्थिति विवादों, आरोपों और दण्ड के लिए प्रस्तावों एवं अन्य दायित्वों से भुगतान किया जाना है, जबकि आदेश सामान्य रूप से किसी मामले की तारीख के बारे में जानकारी सहित बड़ी अन्तर्वस्तु नहीं है।
  3. प्रारूप सम्बन्धी अन्तर – एक निर्णय अदालत के एक निश्चय प्रारूप का पालन करता है, जबकि एक आदेश किसी भी प्रारूप का पालन नहीं करता।
  4. प्रकृति सम्बन्धी अंतर – निर्णय एक दस्तावेज है जिसे अदालत में सुनाया जाता है और एक निश्चित प्रारूप के तहत अंतर्वस्तु निचे लिखा जाता है। यह निश्चित रूप से दस्तावेज की रक्षा करने के लिए किया जाता है, जबकि अदालत के आदेश को दस्तावेज नहीं माना जाता और इसलिए कभी-कभी कुछ मामलों में न्यायाधीश द्वारा इसकी मौखिक रूप से घोषणा की जाती है।

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